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आधुनिक बागवानी का मूलमंत्र- कम खर्च, अधिक लाभ
Tags: Lucknow, PFDC, NCPAH, Rahman Khera
Publised on : 18 February 2014, Time: 22:12
News source: Indian Rural News Agency (IRNA)

Farmers traing in Rahman Khera लखनऊ, 17 फरवरी।सुनियोजित कृषि विकास केन्द्र (पी.एफ.डी.सी.) एन.सी.पी.ए.एच. (भारत सरकार), केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ द्वारा रहमानखेड़ा परिसर, लखनऊ में मंगलवार को टपक सिंचाई, प्लास्टिक मल्ंिचग एवं संरक्षित खेती की उपयोगिता पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लखनऊ जिले के मलिहाबाद ब्लाक से आये लगभग 60 किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर अपने उद्गार प्रकट करते हुए संस्थान के कार्यकारी निदेशक डा. एस. राजन ने टपक सिंचाई के प्रणाली के महत्व को बताया। टपक सिंचाई प्रणाली अपनाने से जल जैसे महत्वपूर्ण घटक के संरक्षण, श्रमिक व्यय, ईंधन खपत में कमी के साथ-साथ पौधों के दैहिकीय गुणों को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर उच्च गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इस कार्यक्रम में संस्थान के फसल सुरक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष एवं पूर्व परियोजना समन्वयक, अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (उपोष्ण फल) डा. ए. के. मिश्र ने के.उ.बा.सं. का बागवानी में योगदान, फलों के तुड़ाई उपरांत प्रबन्धन विभाग के विभागाध्यक्ष डा. अजय वर्मा ने नयी तकनीकों से आर्थिक लाभ एवं फसल उत्पादन विभाग के विभागाध्यक्ष डा. कैलाश कुमार ने के.उ.बा.सं., लखनऊ एवं पी.एफ.डी.सी. लखनऊ द्वारा प्रदत्त सुविधाओं के विषय में किसानों को अवगत कराया। इन आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान कम खर्च में अधिक से अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान एक तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया जिसमें टपक सिंचाई, प्लास्टिक मल्ंिचग एवं संरक्षित खेती की बारीकियों पर प्रकाश डाला गया। तत्पश्चात प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में इन तकनीकों पर किसानों द्वारा किये गये प्रश्नों का निदान किया गया। इन सभी तकनीकों का वास्तविक प्रशिक्षण रहमानखेड़ा प्रक्षेत्र में किसानों को दिया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन डा. वी. के. सिंह, प्रधान वैज्ञानिक एवं पी.आई., पी.एफ.डी.सी. द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में समस्त पी.एफ.डी.सी, लखनऊ स्टाफ का विशिष्ट योगदान रहा।

Web Title: Horticulture for frofit farming