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आश्वासन के बाद डीआरडीए कर्मचारियों का आन्दोलन स्थगित
Tags: Orai, Seed subsidy
Publised on : 13 May 2016 Time: 22:14    News source: Indian Rural News Agency (IRNA)

लखनऊ (उप्रससे) । शासन से मिले आश्वासन के बाद डीआरडीए कर्मचारियों ने दस दिन के लिए अपना आन्दोलन स्थगित कर दिया है। मांग पूरी नहीं होने पर दस दिन बाद फिर से आन्दोलन किया जाएगा। उत्तर प्रदेश डीआरडीए इम्पलाइज यूनियन एक सूत्रीय मांग को लेकर संकेतिक रूप से आन्दोलनरत है।

यूनियन के महामंत्री रवीन्द्र कुमार शुक्ला ने बताया कि दस मई को इसी क्रम में अखिल भारतीय डीआरडीए इम्पाइलज यूनियन के अध्यक्ष शैलेन्द्र त्रिपाठी, महामंत्री दर्शनलाल शर्मा, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी, महामंत्री अतुल मिश्रा, कम्प्यूटर प्रोग्रामर संघ के अध्यक्ष अजीत सिंह, उ.प्र. डीआरडीए इम्पलाइज यूनियन के अध्यक्ष अमोद प्रताप सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरिमोहन शर्मा के नेतृत्व में जवाहर भवन में सुबह दस बजे से आमसभा के उपरान्त दोपहर 1.30 से मुख्यमंत्री आवास की तरफ कर्मचारी कूच करने के दौरान मुख्य सचिव के निर्देश पर हुई वार्ता के उपरान्त डीआरडीए कर्मचारियों ने आन्दोलन स्थगित किया था। इस वार्ता के उपरान्त डीआरडीए कर्मिकों का मुख्य सचिव द्वारा पूर्व में लिए गए निर्णय के अनुसार ग्राम्य विकास विभाग में विलय के निर्णय पर दस दिनों में आदेश देने का आश्वासन मिला है। अगर दस दिनों बाद भी आदेश जारी न हुआ तो 27 मई को प्रदेश स्तरीय बैठक कर हड़ताल का निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पिछले सात माह से बकाया वेतन भुगतान व सरकारी कर्मचारी घोषित किए जाने की मांग को लेकर शनिवार को जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) के कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर दिया था। जनपदों में कर्मचारियों ने डीआरडीए भवन पर धरना -प्रदर्शन किया। इससे पहले कर्मचारी दो मई से काला फीता बांधकर विरोध दर्ज करा रहे थे। श्री शुक्ला ने बताया कि डीआरडीए केन्द्र सरकार की इंदिरा आवास, राज्य सरकार की लोहिया आवास समेत सांसद निधि व विधायक निधि से होने वाले विकास कार्यों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उठाता है। सात महीने से वेतन न मिलने से कर्मचारी कर्ज में डूब गए हैं। उनका कहना है कि केन्द्र और राज्य सरकार के निर्णयों के बीच प्रदेश के डीआरडीए कर्मी पिस रहे हैं। राज्य सरकार ने डीआरडीए कर्मियों को ग्राम विकास विभाग में शामिल किए जाने के लिए मार्च 2015 में निर्णय लिया। वित्त विभाग से वेतन दिए जाने का वादा किया। एक वर्ष बीत जाने के बावजूद इस बारे में कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। यही वजह कि सात महीने से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला।
 

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