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केन्द्र सरकार ने नए साल के लिए खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य सात मिलियन टन बढ़ाया

19  वर्ष 2019-20 के सापेक्ष 2020-21 के लिए उत्पादन लक्ष्य 298 मिलियन टन

    दो दशक में देश में कृषि भूमि में लगभग 2.74 मिलियन हेक्टेयर की कमी

इसी अवधि में सकल फसली क्षेत्र 182.28 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 196.50 मिलियन हेक्टेयर हो गया

Tags:  Gov incresed production target in foodgrains from 291 MT to 298 MT

नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2020, ( Indian Rural News Agency IRNA)। भारत सरकार ने आगामी फसल वर्ष  के लिए खाद्यान्न उत्पादन के लक्ष्य में मामूली वृद्दि की है। इस साल खाद्यान्न उत्पादन की लक्षय पिछले लक्ष्य के मुकाबले सात मिलियन टन अधिक निर्धारित किया गया है। वर्ष 2020-21 के लिए खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य 298.0 मिलियन टन निर्धारित किया गया है। वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान, खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य 291.10 मिलियन टन रखा गया था, जबकि विभिन्न फसलों के क्षेत्र कवरेज और उत्पादकता में वृद्धि के कारण उत्‍पादन लगभग 292 मिलियन टन होने का अनुमान है। यह जानकारी खरीफ फसल के लिए उत्पादन लक्ष्य निर्धारित करने के लिए केन्द्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में आयोजित वीडियो कांफ्रेसिंग बैठक में दी गई।

इस बैठक में कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने आश्वस्त किया कि गांव, गरीब और किसान के सामने कोई भी समस्या नहीं आने दी जाएगी। कृषि राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लाभों को किसानों को समझाया जाना चाहिए। श्री रूपाला ने कहा कि पिछले वर्ष (2018-19) में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन हुआ। इसके  अलावा, देश ने लगभग 25.49 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में 313.85 मिलियन मीट्रिक टन बागवानी उत्पादन किया,  चीन के बाद भारत सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।

अपने संबोधन में, कृषि राज्‍य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि वर्षा के पैटर्न में बदलाव के साथ मौसम में बदलाव की वर्तमान स्थिति में 2018-19 में खाद्यान्‍न का 285 मिलियन टन रिकॉर्ड उत्‍पादन होना उल्लेखनीय है जिसके 2019-20 के दौरान बढ़कर 292 मिलियन होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि यह सब तकनीकी प्रगति के कारण संभव हो रहा है, जिसमें केन्‍द्र और राज्य सरकारों के समर्पित और समन्वित प्रयासों के साथ-साथ सुधार भी शामिल है।

 कृषि आयुक्त डॉ. एस. के. मल्होत्रा ​​ने कहा कि पिछले दो दशकों (1988-89 से 2018-19) के दौरान खेती योग्य कृषि भूमि में लगभग 2.74 मिलियन हेक्टेयर तक की कमी आई है। हालांकि, इसी अवधि के दौरान सकल फसली क्षेत्र 182.28 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 196.50 मिलियन हेक्टेयर हो गया है, जिसमें विशुद्ध बोया गया क्षेत्र काफी हद तक 140 मिलियन हेक्टेयर पर अपरिवर्तित रहा है। उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न तकनीकी और नीतिगत हस्तक्षेपों के कारण खाद्यान्न का उत्पादन169.92 मिलियन टन से बढ़कर 284.96 मिलियन टन हुआ है।

जहां तक रबी की फसलों का संबंध है, तो यह निर्णय लिया गया है कि सभी राज्य ग्राम , ब्लॉक स्तरों पर इसकी खरीद सुनिश्चित करेंगे क्योंकि किसानों को लॉकडाउन के कारण ब्लॉक से बाहर निकलने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा,सभी राज्य किसानों से उत्पादित फसल का प्रत्यक्ष खरीद करने के लिए कदम उठा रहे हैं।

सभी राज्यों को सलाह एवं दिशा निर्देश जारी किए गए हैं और देश भर में ग्राम , ब्लॉक स्तरों पर इस तरह के आदानों की सही समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बीजों और उर्वरकों से लदे ट्रकों व अन्य वाहनों की आवाजाही के लिए छूट दी गई है। सरकार ने किसानों को इलेक्ट्रॉनिक ऑनलाइन व्यापार मंच और बेहतर आर्थिक लाभ प्रदान करने के लिए ई-एनएएम प्रणाली को भी मजबूत किया है।

पिछले दशकों में कई प्रयासों के बावजूद, बड़ा कृषि क्षेत्र अभी भी मानसून पर निर्भर है और मानसून की विफलता के कारण, किसानों को अपनी फसलों के अस्तित्व के लिए कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं को हल करने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाय) को कार्यान्वित किया जा रहा है जिसका उद्देश्य सुनिश्चित सिंचाई के तहत खेती योग्य क्षेत्र का विस्तार करना, पानी की बर्बादी को कम करने के लिए खेत में उपलब्ध जल उपयोग दक्षता में सुधार लाना, सटीक सिंचाई और अन्य पानी की बचत करने वाली प्रौद्योगिकियों के अपनाए जाने को बढ़ावा देना है।

राष्ट्रीय खाद्य और पोषण सुरक्षा मिशन (एनएफएनएसएम) की अग्रिम योजना और कार्यान्वयन के लिए राज्य कार्य योजना (एसएपी) के प्रारूप को सरल और कम करके लगभग एक पृष्ठ का कर दिया गया है, ताकि राज्यों को तैयार की गई एसएपी मिल सकें और उसे वे न्यूनतम प्रयासों के साथ सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद भारत सरकार के पास जमा करवा सकें। राष्ट्रीय खाद्य और पोषण सुरक्षा मिशन मुख्य रूप से खाद्यान्न उत्पादन के लिए एक जनादेश है और देश भर में राज्य कृषि विभागों के माध्यम से प्रोजेक्टाइज़्ड मोड पर लागू किया जाता है।

विशेष सचिव, अतिरिक्त सचिव (कृषि) और कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, आईसीएआर के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न राज्य सरकारों के अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया। कृषि क्षेत्रों में खरीफ सीजन के दौरान क्षेत्र कवरेज, उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए संबंधित राज्यों में अपनाई जाने वाली रणनीतियों,चुनौतियों, उपलब्धियों को साझा करने के लिए पांच समूहों में सभी राज्यों के कृषि उत्पादन आयुक्तों और प्रमुख सचिवों के साथ एक बातचीत सत्र भी आयोजित किया गया।

Web Title: Trump announced $ 19 Bilion relief pakage for Farmers, $ 16 Bilion in  direct benifit

 

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