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कोरोना के कारण गेहूं की कटाई में पिछड़ गए पंजाब और हरियाणा

19   देश के 310 लाख हेक्टूयेर में गेहूं  की फसल

    साठ से पैंसठ प्रतिशत तक हुई गेहूं की कटाई

Tags:  Wheet crop in India,

नई दिल्ली , 19 अप्रैल 2020, ( Indian Rural News Agency IRNA)।   कोरोना के कारण लाकडाउन और कुछ राज्यों में कर्फ्यू के चलते गेहूं की कटाई प्रभावित हो रही है। गेहूं कटाई में देरी से किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका व्यक्त की गई है। क्योंकि यदि गेहूं की कटाई समय पर नहीं हुई तो गहाई मे भी देरी होगी। इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित गेहूं उत्पादक राज्य हरियाणा और पंजाब हुए हैं। इन राज्यों में अभी तक मात्र 10 से 15 प्रतिशत तक ही गेहूं की कटाई हो सकी है। हालांकि अन्य गेहूं उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में गेहूं की कटाई की स्तिति कुछ बेहतर है। इस साल देश के 310 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल बोई गई थी। इसमें से अबतक 60 से 65 प्रतिशत तक गेहूं की कटाई हो चुकी है।

केन्द्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार देश में 310 लाख हेक्टेयर भूमि में बोई गई गेहूं की कुल रबी फसल में से 63-67 प्रतिशत की कटाई हो चुकी है। राज्यवार कटाई भी बढ़ी है और यह मध्य प्रदेश में 90-95 प्रतिशत, राजस्थान में 80-85 प्रतिशत,उत्तर प्रदेश में 60-65 प्रतिशत,हरियाणा में 30-35 प्रतिशत और पंजाब में 10-15 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। हरियाणा,पंजाब,उत्‍तर प्रदेश में कटाई अपने चरम पर है और अप्रैल 2020 के अंत तक इसके पूरा होने की संभावना है। पंजाब ने फसल काटने की 18000 मशीनों को लगाया है जबकि हरियाणा ने कटाई और गाहने (थ्रेशिंग) के लिए फसल काटने की 5000 मशीनें लगाई हैं। देश में रबी के दौरान 161 लाख हेक्टेयर जमीन में बोई गई दालों में से,चना,मसूर,उड़द,मूंग और मटर की कटाई पूरी हो गई है। गन्ने की, कुल 54.29 लाख हेक्टेयर में बोई गई फसल की,महाराष्ट्र,कर्नाटक, गुजरात,आंध्र प्रदेश,तेलंगाना और पंजाब में कटाई पूरी हो गई है। तमिलनाडु,बिहार,हरियाणा और उत्तराखंड राज्यों में92-98 प्रतिशत कटाई पूरी हो चुकी है। उत्तर प्रदेश में, 75-80 प्रतिशतकटाई पूरी हो चुकी है और यह मई 2020 के मध्य तक जारी रहेगी।

आंध्र प्रदेश,असम,छत्तीसगढ़, गुजरात,कर्नाटक,केरल,ओडिशा,तमिलनाडु,तेलंगाना,त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल राज्यों में 28 लाख हेक्टेयर जमीन में बोये गए रबी की फसल के धान की कटाई की आरंभिक अवस्‍था में है क्योंकि अनाज की लदाई अभी चल रही हैऔर कटाई का समय अलग होगा। तिलहन फसलों के बीच, 69 लाख हेक्टेयर में बोई गई रेपसीड सरसों की फसल की राजस्थान, उत्‍तर प्रदेश,मध्‍य प्रदेश,हरियाणा,पश्चिम बंगाल,झारखंड,गुजरात,छत्तीसगढ़, बिहार, पंजाब, असम, अरुणाचल प्रदेश और संघ शासित जम्‍मू और कश्मीर में कटाई हो चुकी है। 4.7 लाख हेक्टेयर में बोई गई मूंगफली की 85-90 प्रतिशतफसल की कटाई हो चुकी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 17अप्रैल 2020 तक, देश में गर्मियों की बुवाई पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है। मौसम में हुई वर्षा पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक रही, जो गर्मियों की फसलों की बुवाई के लिए अनुकूल रही है। एक वर्ष पहले इसी अवधि की तुलना में, ग्रीष्मकालीन फसल का कुल क्षेत्र 38.64 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 52.78 लाख हेक्टेयर हो गया है। दालों,मोटे अनाजों, पोषक तत्व वाले अनाजों और तिलहनों के अंतर्गत शामिल क्षेत्र पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में 14.79 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 20.05 लाख हेक्टेयर हो गया है।  पश्चिमबंगाल, तेलंगाना, ओडिशा, असम, गुजरात,कर्नाटक, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु,बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और केरल राज्यों में लगभग 33 लाख हेक्टेयर भूमि में ग्रीष्मकालीन धान की रोपाई की गई है।  तमिलनाडु,उत्तर प्रदेश,पश्चिम बंगाल,गुजरात,छत्तीसगढ़,बिहार,पंजाब, कर्नाटक, महाराष्ट्र,मध्य प्रदेश, झारखंड और तेलंगाना राज्यों में लगभग 5लाख हेक्टेयर भूमि में दलहनों को बोया गया है। पश्चिम बंगाल,कर्नाटक,गुजरात,उत्तर प्रदेश,महाराष्ट्र,तमिलनाडु,तेलंगाना,छत्तीसगढ़,मध्य प्रदेश,पंजाब और बिहार राज्यों में लगभग 7.4 लाख हेक्टेयर जमीन पर तिलहनों की बुआई की गई है। पश्चिम बंगाल में जूट की बुवाई भी शुरू हो गई है और बारिश से फायदा हुआ है।

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